- जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- जनजातीय कार्य मंत्रालय ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विभिन्न जनजातीय आंदोलनों और विद्रोहों की स्मृति में तथा उनकी संस्कृतियों और इतिहास को बढ़ावा देने के लिए 11 संग्रहालय स्थापित कर रहा है।
- जनजातीय कार्य मंत्रालय, आदि संस्कृति और आदि वाणी जैसी अन्य डिजिटल पहलों के ज़रिए जनजातीय कला, भाषा और परंपराओं को बढ़ावा देता है
जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी और उपनिवेशवाद-विरोधी बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में भारत में हर साल 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस (जनजातीय गौरव) मनाया जाता है। बिरसा मुंडा का जन्म 1874 में हुआ था। वर्ष 2024-25 को उनके जन्म के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। साल भर तक चलने वाले देशव्यापी समारोहों के एक भाग के रूप में, 1-15 नवंबर का पखवाड़ा भारत के उपनिवेशवाद-विरोधी संघर्ष में बिरसा मुंडा और अन्य भारतीय जनजातीय नेताओं के बलिदान और संघर्षों का सम्मान करने और देश की जनजातीय संस्कृतियों और विरासत की समृद्ध विविधता का जश्न मनाने के लिए एक खास तरीके से आयोजित किया जा रहा है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय, जनजातीय इतिहास और संस्कृतियों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएँ चलाता है। जनजातीय गौरव वर्ष समारोह के एक भाग के रूप में, देश भर में कई कार्यशालाएँ, कार्यक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सरकार की एक प्रमुख पहल हमारे ऐतिहासिक जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करने के लिए 11 संग्रहालयों की स्थापना करना भी है।
जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय पहल
भारत के जनजातीय नेताओं ने दमनकारी ब्रिटिश शासन और सामंती व्यवस्था का विरोध करने में अहम भूमिका निभाई है। इनमें से कई विद्रोह, बगावत और आंदोलनों को मुख्यधारा के भारतीय इतिहास में कम प्रतिनिधित्व मिला है, हालाँकि इन आंदोलनों ने आज के भारत को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार ने जनजातीय नेताओं से जुड़ी जानकारी को संरक्षित, प्रलेखित और प्रसारित करने तथा जनता को इन आंदोलनों के बारे में जागरूक करने के लिए संग्रहालय स्थापित करने का फैसला लिया है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय, जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को सहायता योजना के तहत, इन जनजातीय संग्रहालयों की स्थापना के लिए राज्य सरकारों को धन उपलब्ध कराता है।
शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक-और-जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय
छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक-और-जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय, जिसका उद्घाटन हाल ही में 1 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, औपनिवेशिक शासन के खिलाफ छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों के संघर्षों को दर्शाता है।
संग्रहालय का निर्माण ₹53.13 करोड़ की लागत से किया गया है, जिसमें से ₹42.47 करोड़ जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा और ₹10.66 करोड़ राज्य सरकार द्वारा प्रदान किए गए हैं। इसमें 16 दीर्घाओं में 650 मूर्तियाँ और डिजिटल प्रतिष्ठान हैं। इन डिजिटल प्रतिष्ठानों में डिजिटल स्क्रीन और डिस्प्ले, स्थलाकृतिक प्रक्षेपण मानचित्र, ऑडियो-विजुअल डिस्प्ले, एक एआई-फोटो बूथ, एक कर्व स्क्रीन और एक आरएफआईडी डिजिटल स्क्रीन शामिल हैं।उद्घाटन समारोह के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीर नारायण सिंह की एक प्रतिमा का अनावरण किया, ‘आदि शौर्य’ नामक एक ई-पुस्तिका का विमोचन किया और शहीद के वंशजों के साथ भी बातचीत की।
बिंझवार जनजाति के नारायण सिंह, छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में सोनाखान के जमींदार थे। 1856 में जब अंग्रेजों द्वारा अनाज की जमाखोरी के कारण ओडिशा में अकाल पड़ा, तो उन्होंने भूख से मर रहे लोगों को भोजन मुहैया कराने के लिए ब्रिटिश अनाज भंडारों के ताले तोड़ दिए। अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर रायपुर जेल में कैद कर दिया। वीर नारायण सिंह वहाँ से भाग निकले और अपनी सेना बनाई।
29 नवंबर, 1856 को नारायण सिंह की सेना ने ब्रिटिश सेना को हरा दिया। हालाँकि, बाद में अंग्रेज़ एक बड़ी सेना के साथ वापस लौटे और नारायण सिंह को पकड़ लिया गया। 10 दिसंबर 1857 को उन्हें एक चौराहे पर बेरहमी से फाँसी दे दी गई।
भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय, रांची, झारखंड का उद्घाटन 15 नवंबर 2021 को किया था।
झारखंड के उलिहातु गाँव में जन्मे बिरसा मुंडा ने उलगुलान या “महा-उग्र” (1899-1900) का नेतृत्व किया, जो जनजातीय स्वशासन और खुंटकट्टी (सामुदायिक भूमि अधिकार) की बहाली के लिए एक उग्र आंदोलन था। एक आध्यात्मिक सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर, उन्होंने मुंडा जनजातियों को ब्रिटिश भूमि कानूनों और सामंती शोषण के खिलाफ एकजुट किया। धरती आबा (“पृथ्वी के पिता”) के रूप में प्रसिद्ध बिरसा मुंडा ने औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्त एक नैतिक, स्व-शासित समाज की कल्पना की। 25 वर्ष की उम्र में उन्हें रांची जेल में बंदी बनाकर शहीद कर दिया गया।
बादल भोई राज्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय
बादल भोई राज्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का उद्घाटन 15 नवंबर 2024 को छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश में हुआ।
बादल भोई का जन्म सन् 1845 में छिंदवाड़ा जिले में हुआ था। उनके नेतृत्व में, हज़ारों की तादाद में जनजातीय समुदाय के लोगों ने 1923 में कलेक्टर के बंगले पर प्रदर्शन किया। इस दौरान लाठीचार्ज किया गया और भोई को गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ साल बाद, अगस्त 1930 में, उन्हें वन कानून तोड़ने के आरोप में रामाकोना में ब्रिटिश अधिकारियों ने फिर से गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने अपने जीवन के आखिरी कुछ साल जेल में बिताए और कथित तौर पर 1940 में अंग्रेजों ने उन्हें जहर दे दिया था।
राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय
राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का उद्घाटन 15 नवंबर 2024 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में किया गया।
गोंड साम्राज्य के राजा निज़ाम शाह के वंशज, राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने 1857 की घटनाओं के दौरान ब्रिटिश शासन का बखूबी विरोध किया। अहिंसा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बावजूद, इन कुशल कवियों ने अपनी कविताओं को ब्रिटिश प्रभाव का प्रतिरोध करने के एक सशक्त माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया। राजा शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह को 18 सितंबर 1858 को अंग्रेजों ने बंदी बनाकर फाँसी दे दी।
जनजातीय गौरव वर्ष समारोह
जनजातीय गौरव वर्ष का यह खास पखवाड़ा जनजातीय पहचान, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को प्रदर्शित करने और जनजातीय सशक्तिकरण के लिए सरकारी पहलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए पूरे देश में मनाया जा रहा है।
जनजातीय इतिहास और संस्कृतियों को बढ़ावा देने वाली अन्य पहल
भारत सरकार विभिन्न योजनाओं और पहलों के ज़रिए अनुसूचित जनजाति समुदायों की समृद्ध संस्कृतियों और विरासत को भी बढ़ावा देती है, जिसका मकसद उनकी विशिष्ट पहचान को संरक्षित करना और उन्हें मुख्यधारा की भारतीय चेतना और इतिहास में शामिल करना है।
जनजातीय गौरव दिवस समाज के एक बड़े पैमाने पर हाशिए पर पड़े वर्ग, अनुसूचित जनजातियों, के योगदान, इतिहास, संस्कृतियों और परंपराओं पर रोशनी डालता है। इस दिवस और जनजातीय गौरव वर्ष के ज़रिए बिरसा मुंडा की विरासत का स्मरण करते हुए और अन्य पहलों के साथ-साथ 11 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों की स्थापना करके, भारत सरकार समुदाय के संघर्षों और उपलब्धियों को, राष्ट्र की सामूहिक चेतना में समाहित करने का प्रयास कर रही है। ये सभी प्रयास कुल मिलाकर एक भारत, श्रेष्ठ भारत, एक ऐसे संयुक्त राष्ट्र के निर्माण की पुष्टि करते हैं, जो अपने सभी समुदायों की शक्ति और भावना का सम्मान करता है।