वंदे मातरम के 150 साल

अक्टूबर 1905 में, उत्‍तरी कलकत्ता में मातृभूमि को एक मिशन और धार्मिक जुनून के तौर पर बढ़ावा देने के लिए एक 'बंदे मातरम संप्रदाय'की स्थापना की गई थी। इस संप्रदाय के सदस्य हर रविवार को"वंदे मातरम" गाते हुए प्रभात फेरियाँ निकालते थे और मातृभूमि के समर्थन में लोगों से स्‍वैच्छिक दान भी लेते थे। इस संप्रदाय की प्रभात फेरियों  में कभी-कभी रवींद्रनाथ टैगोर भी शामिल होते थे।